Saturday, December 13, 2014
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आस्था और व्यवस्था में संतुलन जरूरी
यहां पर्वों के उत्साहपूर्ण आयोजनों को संकुचित करने अथवा बांधने का सुझाव देने की मंशा कतई नहीं है। ना ही आम रास्तों के अवरुद्ध होने से जूझती ...
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राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के हालात को दर्पण दिखाती एक लघुकथा! एक और "सीता माता " के संघर्ष की कथा! प्रमुख राष्ट्रीय दैन...
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हमारे लोकतांत्रिक चरित्र की यही असल तस्वीर है। हमारा सामाजिक चरित्र मोटे तौर पर भावना-प्रधान है और समाज यह प्राथमिकता से चाहता है कि काम कोई...
1 comment:
kya gazzab ka likha hai
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